राजस्थानी 'गर्मी' देगी कश्मीर की 'ठंडी' पड़ी राजनीति को गर्माहट !

टीम भारत दीप |
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सचिन पायलट बीजेपी में शामिल होते हैं तो जम्मू कश्मीर में नए समीकरण भी जन्म ले सकते हैं।
सचिन पायलट बीजेपी में शामिल होते हैं तो जम्मू कश्मीर में नए समीकरण भी जन्म ले सकते हैं।

जम्मू कश्मीर की राजनीति पर इसका असर देखने को मिलेगा। आप नज़र रखिए और देखिए भारतीय राजनीति में जल्द ही एक बड़ा उलटफेर हो सकता है।

जयपुर। राजस्थान में सियासी पारा ​बहुत गर्म है। कहीं ये गर्मी जम्मू कश्मीर की 'ठंडी' पड़ी राजनीति को गर्माहट तो नहीं देने वाली है ? इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। यदि सचिन पायलट की एंट्री बीजेपी में हो जाती है या यूं कहें कि पुराने दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया उन्हें अपने पाले में लाने में कामयाब हो जाते हैं तो ज़रूर जम्मू कश्मीर की राजनीति पर इसका असर देखने को मिलेगा। आप नज़र रखिए और देखिए भारतीय राजनीति में जल्द ही एक बड़ा उलटफेर हो सकता है।

फूंक दिए बगावती सुर
राजस्थान के डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कांग्रेस से बगावत का ऐलान कर दिया है। चर्चा ये है कि वह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं। या फिर वह एक नई पार्टी का ऐलान करेंगे। नई पार्टी 'प्रगतिशील कांग्रेस का नाम भी सामने आ गया है। यह तो तय हो गया है कि सचिन राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा बुलाई गई विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होने जा रहे हैं न ही उनके समर्थक ​विधायक। संख्या पर अभी भी बहुत कुछ साफ नहीं हो पाया है लेकिन जल्द ही ये भी स्पष्ट हो जाएगा। 

सचिन का जम्मू कश्मीर कनेक्शन
गौरतलब है कि सचिन पायलट की पत्नी सारा सचिन पायलट जम्मू एंड कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और सांसद फारूक अब्दुल्लाह की बेटी हैं। यदि सचिन पायलट बीजेपी में शामिल होते हैं तो जम्मू कश्मीर में नए समीकरण भी जन्म ले सकते हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि जम्मू में फारूक अब्दुल्लाह का भारतीय जनता पार्टी के साथ गठजोड़ भी हो जाए। भारतीय राजनीति में अब ये बात सामान्य सी हो गई। राजनीतिक फायदे के लिए हाल ही में हुए इस तरह के कई राजनीतिक गठजोड़ आपके सामने हैं। धारा 370 और 35ए हटाने के बाद हाल ही में ही केंद्र सरकार ने फारूक अब्दुल्लाह और उनके बेटे पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह की नज़रबंदी हटा दी है। ये बातें भी तो कुछ इशारा तो कर ​ही रहीं हैं। 

किसके बल पर पायलट उड़ा रहे 'प्लेन'
सचिन पायलट ने रविवार रात को ही बगावती सुर बोलते हुए कह दिया था कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है। वह खुद भी इसका हिस्सा हैं और उन्होंने ऐसी बात कही। ऐसे में इस बात के संकेत मिलते हैं कि सचिन पायलट अकेले मैदान में नहीं हैं। पर्दे के पीछे से उन्हें सपोर्ट मिल रहा है, नहीं तो अशोक गहलोत जैसे मंझे हुए नेता के सामने सचिन पायलट का टिकना उतना आसान नहीं है। फिलहाल भारतीय जनता पार्टी इस पूरे मामले को थर्ड अंपायर के तौर पर देख रही है। जहां उसे फील्ड में मौजूद अंपायर का इशारा मिला तो वह मैदान में कूद पड़ेगी। 

सिंधिया का बयान क्या दे रहा संकेत
इस पूरे मामले में बीजेपी मध्यप्रदेश की तरह ही डील कर रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अमित शाह को पल—पल की ख़बर दे रहे हैं। वहीं सचिन पायलट के करीबी दोस्त रहे अब भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर सचिन पायलट के इस क़दम का समर्थन किया है। ट्वीट में उन्होंने कहा कि 'मेरे पुराने साथी सचिन पायलट की स्थिति देखकर दुखी हूं। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें दरकिनार किया। यह दिखाता है कि कांग्रेस में टैलेंट और क्षमता की क़द्र नहीं है'। उनका ये ट्वीट तो साफ संकेत है कि फिलहाल बीजेपी सचिन पायलट पर भले ही कुछ साफ न कर रही हो लेकिन मौका मिलने पर उन्हें अपने साथ करने से चूकेगी नहीं। 


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