NIT के समक्ष पेश नहीं हुए IBA, DFS और मौजूदा यूनियन, बैंकों ने जो किया ऐसा तो बच्चे करते हैं

टीम भारत दीप |

हमें काॅपी नहीं मिली।
हमें काॅपी नहीं मिली।

बैंकों के प्रतिनिधियों की बचकानी हरकत पर ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी ने कहा कि देश नो पेपर इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है, आज ईमेल की वैधता रजिस्टर्ड डाक के बराबर है।

बैंकिंग डेस्क। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद बैंककर्मियों के वेतन और पेंशन से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण (NIT) में सुनवाई चल रही है। वी बैंकर्स की याचिका पर हाईकोर्ट ने मामले में ट्रिब्यूनल गठित करने का आदेश दिया था। 

इसमें इंडियन बैंक एसोसिएशन, भारत सरकार के वित्तीय सेवा प्रभाग, सभी पीएसबी और मौजूदा श्रमिक संघों को पार्टी बनाया गया है। हालांकि बैंकर्स के मुद्दे को लेकर ये कितना गंभीर हैं, यह इस बार की तारीख में साफ हो गया। ट्रिब्यूनल के सामने बैंकों के प्रतिनिधियों को छोड़कर और तो कोई हाजिर नहीं हुआ। बैंकों के प्रतिनिधियों ने भी ऐसा बहाना दिया जो अक्सर बच्चे दिया करते हैं। 

वी बैंकर्स की ओर से बताया गया है कि ट्रिब्यूनल के समक्ष मौजूदा श्रमिक संघों, भारतीय बैंक संघ और वित्तीय सेवा प्रभाग का कोई भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। बैंकों के जो प्रतिनिधि आए उन्होंने कहा कि उन्हें क्लैम स्टेट्मेंट की काॅपी नहीं मिली है।  

जवाब में वी बैंकर्स ने 3 जनवरी को ईमेल से क्लैम स्टेट्मेंट भेजे जाने का प्रमाण प्रस्तुत किया। इस पर बैंकों के प्रतिनिधियों ने कहा कि नियम तो हार्ड कापी भेजने का है। हमें काॅपी नहीं मिली। बैंकों के प्रतिनिधियों की बचकानी हरकत पर ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी ने कहा कि देश नो पेपर इकॉनमी की ओर बढ़ रहा है, आज ईमेल की वैधता रजिस्टर्ड डाक के बराबर है। 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से यह आशा नहीं की जाती कि वे नियमों का हवाला देते हुए तकनीकी आधार पर हार्ड कापी की मांग करें। फिर भी क्योंकि नियमों में संशोधन नहीं हुआ है इसलिए वी बैंकर्स को निर्देश दिया जाता है कि वह सभी पक्षकारों को डाक से क्लैम स्टेट्मेंट की काॅपी 15 दिन में भेजें। 

इसके बाद ट्रिब्यूनल ने सभी विपक्षी पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे अगली तारीख से पहले वी बैंकर्स को क्लैम स्टेट्मेंट पर लिखित प्रतिवेदन की काॅपी भेजते हुए एक कापी ट्रायब्यूनल को भी भेजें। ट्रिब्यूनल ने अगली तारीख पर सभी पक्षकारों को उपस्थित रहने का आदेश भी दिया है। इसके साथ ही अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल 2021 की तारीख भी निर्धारित कर दी है।  


संबंधित खबरें