1 अप्रैल से बदल रहे इनकम टैक्स के नियम, आपकी जेब पर यूं होगी निगरानी और यहां मिलेगा फायदा
नए नियम 1962 के पुराने इनकम टैक्स नियमों की जगह लेंगे। सरकार का लक्ष्य मार्च की शुरुआत तक फाइनल रूल्स को नोटिफाई करना है ताकि नए वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल) से एक पारदर्शी और सरल टैक्स व्यवस्था लागू की जा सके।
व्यापार डेस्क। आयकर विभाग ने देश में कर व्यवस्था को सरल और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने आयकर नियम, 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। यह 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट, 2025 को प्रभावी बनाएगा। इन नए नियमों का उद्देश्य टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, जिसमें प्री-फिल्ड फॉर्म्स और कागजी कार्रवाई में भारी कमी शामिल है।
ड्राफ्ट में पैन कार्ड के इस्तेमाल, एचआरए के लिए मेट्रो शहरों की सूची और क्रिप्टो लेन-देन को लेकर बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। जनता की राय के बाद मार्च के पहले हफ्ते में फाइनल नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा।
टैक्सपेयर्स के लिए अनुपालन को आसान बनाने के लिए नियमों की संख्या घटाई गई है। मौजूदा 511 नियमों को घटाकर अब केवल 333 कर दिया गया है। टैक्स फॉर्म्स की संख्या 399 से घटाकर 190 करने का प्रस्ताव है। इससे रिटर्न फाइल करना पहले से कहीं ज्यादा तेज और सुविधाजनक होगा।
अब एक लाख रुपये से कम के होटल बिल के भुगतान पर पैन देना जरूरी नहीं होगा। दोपहिया या चौपहिया वाहन खरीदते समय अगर कीमत पांच लाख रुपये से अधिक है, तो पैन देना अनिवार्य होगा। अचल संपत्ति के मामले में, अगर कीमत 20 लाख रुपये से ज्यादा है, तो पैन कोट करना जरूरी होगा।
साल भर में 10 लाख रुपये से ज्यादा के कैश डिपॉजिट या विदड्रॉल पर पैन देना अनिवार्य होगा। बीमा कंपनियों के साथ खाता-आधारित संबंध रखने के लिए पैन जरूरी कर दिया गया है।
हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) की गणना के लिए मेट्रो शहरों की सूची में बेंगलुरु, पुणे, अहमदाबाद और हैदराबाद को भी शामिल किया गया है। इससे इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को ज्यादा टैक्स छूट मिल सकेगी। आधिकारिक वाहनों और मुफ्त भोजन जैसी सुविधाओं की टैक्स-फ्री सीमा बढ़ा दी गई है, जिससे कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा।
अब क्रिप्टो एक्सचेंजों को अनिवार्य रूप से टैक्स विभाग के साथ जानकारी साझा करनी होगी। इससे क्रिप्टो ट्रांजेक्शन पर निगरानी बढ़ेगी। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के एक स्वीकार्य मोड के रूप में मान्यता दी जाएगी।
नए नियम 1962 के पुराने इनकम टैक्स नियमों की जगह लेंगे। सरकार का लक्ष्य मार्च की शुरुआत तक फाइनल रूल्स को नोटिफाई करना है ताकि नए वित्तीय वर्ष (1 अप्रैल) से एक पारदर्शी और सरल टैक्स व्यवस्था लागू की जा सके।