31 साल तक ‘सच‘ पर अडिग रही मासूम, दरिंदे को सजा दिलाकर ही लिया दम
पीड़िता के पिता ने मामले में तहरीर दी और पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसके बाद चला तारीख पर तारीख का दौर। इंतजार में 31 साल का लंबा वक्त बीत गया। समय के साथ पीड़िता की उम्मीद और हौसला मजबूत होता गया।
फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से न्याय व्यवस्था में विश्वास और सच के लिए अंतिम दम तक लड़ने का मामला सामने आया है। बचपन की उस काली रात के सच को एक मासूम ने अपनी जुबान पर अडिग रखा। बिना डरे उसने 31 साल बाद भी वही कहा जो दरिंदे ने उसके साथ किया था। इसके बाद जज ने आरोपी को दोषी कहने में देर नहीं की।
मामला सिरसागंज थाना क्षेत्र के एक गांव का है। 6 मई 1995 की वह रात जिसमें 11 साल की मासूूम अपने घर के आंगन में चैन की नींद सो रही थी। उसी रात नौरतन सिंह पर हैवानियत का भूत सवार हुआ और वह घर के आंगन से बच्ची को उठाकर रेलवे लाइन के पास ले गया। यहां उसने बच्ची दुष्कर्म की कोशिश की लेकिन कुछ और गलत होता इससे पहले बिटिया के घरवाले आ गए और नौरतन भाग निकला।
इसके बाद पीड़िता के पिता ने मामले में तहरीर दी और पुलिस ने एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसके बाद चला तारीख पर तारीख का दौर। इंतजार में 31 साल का लंबा वक्त बीत गया। समय के साथ पीड़िता की उम्मीद और हौसला मजबूत होता गया। इसी बीच मामले के वादी उसके पिता और गवाह चाचा का भी निधन हो गया लेकिन वह नहीं डिगी।
आखिरकार तीन दशक के बाद वह दिन आया जब विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट नवनीत गिरि ने मेडिकल रिपोर्ट और पीड़िता के बयानों के आधार पर दोषी को पांच वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोषी पर 14 हजार का जुर्माना भी लगाया गया जिसकी आधी रकम पीड़िता को दी जाएगी।
जब 31 साल पुरानी याद हुई ताजा
कोर्ट में बचाव पक्ष के वकीलों ने पीड़िता का हौसला तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा कि उसे सही तारीख व समय याद नहीं है लेकिन न्यायाधीश ने उनके सभी तर्काें को खारिज कर दिया।
कोर्ट में 31 साल पुरानी तहरीर तब ताजा हो गई जब पीड़िता ने अपने पिता के हस्ताक्षर को एक बार में पहचान लिया। इसी के साथ उसके अडिग बयान दोषी के लिए सजा का रास्ता तैयार करते गए।