मध्यप्रदेश कम्प्यूटर बाबा बंदूक चलाने के भी शौकीन, जेल में ध्यान मुद्रा में बैठे

टीम भारत दीप |

बाबा को सेंट्रल जेल की बैरक नंबर 5 में रखा है।
बाबा को सेंट्रल जेल की बैरक नंबर 5 में रखा है।

भाजपा सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि कम्प्यूटर बाबा को धर्म की पताका फहराना चाहिए थी, लेकिन वो राजनीति का वायरस फैला रहे थे। उनमें राजनीति का वायरस घुस गया था।

इंदौर। प्रदेश सरकार ने कम्प्यूटर बाबा के खिलाफ जो अभियान शुरू किया वह पूरे दिन जारी रहा। इस सिलसिल में सोमवार को भी तहकीकात जारी रहेगी।

कम्प्यूटर बाबा के अहिल्यापुरी एक्सटेंशन में और सुपर कॉरिडोर पर करीब साढ़े तीन हजार वर्गफीट एरिया में भी कब्जे मिले हैं।अहिल्यापुरी मामले में निगम द्वारा पहले से जांच हो रही है। 

वहीं, प्रशासन को बाबा के कई बैंक अकाउंट होने और उनमें अधिक रुपए जमा होने की भी शिकायतें मिली हैं। प्रशासन ने बाबा की जमीनों के साथ ही उनके खातों की भी जांच शुरू करवा दी है।

बाबा पर हुई कार्रवाई पर अब वार-बचाव रूपी बयान देने का सिलसिला शुरू हो गया। पहले दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि इंदौर में बदले की भावना से कम्प्यूटर बाबा का आश्रम व मंदिर बिना नोटिस दिए तोड़ा जा रहा है।

यह राजनीतिक प्रतिशोध की चरम सीमा है। सोमवार को दिग्विजय इंदौर आकर बाबा से मिलेंगे। विधायक जीतू पटवारी ने कहा कि पहले बाबा भाजपा के साथ थे, तब अतिक्रमण नहीं दिखा। पहले वह संत लग रहे थे और अब शैतान लग रहे हैं।

वहीं भाजपा सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि कम्प्यूटर बाबा को धर्म की पताका फहराना चाहिए थी, लेकिन वो राजनीति का वायरस फैला रहे थे। उनमें राजनीति का वायरस घुस गया था।

नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे ने कहा कि ऐसे बाबाओं पर ऐसी ही सख्त कार्रवाई की जरूरत है। उधर, जैन समाज ने मुख्यमंत्री के नाम धन्यवाद का पत्र सांसद लालवानी को सौंपा।

बाबा का आश्रम जैन समाज के प्रमुख स्थल गोम्मटगिरि तीर्थ क्षेत्र के पास बना था।कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि यहां अवैध कब्जा था। नोटिस देने टीम गई थी।

किसी ने नहीं लिया तो चस्पा भी किया गया था। बाबा को पुलिस वैन में बैठाकर जेल ले जा रहे थे।तब उन्होंने पूछा मेरा गनमैन भी साथ था, अफसरों ने कहा हां सभी अन्य वाहन में आ रहे हैं। बाबा को सेंट्रल जेल की बैरक नंबर 5 में रखा है।

वे वहां ध्यान की मुद्रा में बैठे हैं। जेल में कोई विरोध नहीं किया। कम्प्यूटर बाबा के आश्रम से मिली बंदूक की जांच करवाई जा रही है। हालांकि प्रारंभिक तौर पर पता चला है कि बंदूक लाइसेंसी है।

सोमवार को कलेक्टोरेट में लाइसेंस शाखा से बंदूक के लाइसेंस का रिकॉर्ड चेक करवाया जाएगा कि यह किस के नाम पर है। मालूम हो कि बाबा धार्मिक कार्यों से ज्यादा राजनीतिक कार्यो से चर्चा में रहते है।


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