मथुराः प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद 7 दिन में बहाल, अखबारों ने झूठ फैलाया, निलंबन और बहाली में जल्दबाजी बनी सवाल
भाजपा के एक मंडल स्तरीय नेता की शिकायत पर प्राथमिक विद्यालय नौहझील के प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद को बीएसए ने निलंबित कर दिया था।
नौहझील (मथुरा)। मथुरा नौहझील स्थित प्राथमिक विद्यालय नौहझील के प्रधानाध्यापक को निलंबन के सात दिन के भीतर बहाल कर दिया गया है। उनकी यह बहाली कहने को जांच में सही साबित होने पर हुई है लेकिन स्कूल के बच्चों और नौहझील के जनता के मिले अपार सम्मान ने शासन-प्रशासन को उनके पक्ष में निर्णय देने पर मजबूर कर दिया।
बता दें कि 31 जनवरी को भाजपा के एक मंडल स्तरीय नेता की शिकायत पर प्राथमिक विद्यालय नौहझील के प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद को बीएसए ने निलंबित कर दिया था। उन पर आरोप था कि वे विद्यालय में नमाज पढ़ने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करते हैं और विशेष धर्म की शिक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं।
जान मोहम्मद के निलंबन के बाद स्कूल के बच्चे और नौहझील की जनता उनके समर्थन में आ गई। स्थानीय स्तर से लेकर जिला स्तर तक विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद मांट विधायक राजेश चौधरी ने भी अपने फेसबुक अकाउंट से जान मोहम्मद के मामले में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि जान मोहम्मद और नौहझील के लोग उनसे मिलने आए थे।
इसके बाद आनन-फानन में बीएसए रतन कीर्ति ने सातवें दिन ही उनकी बहाली का आदेश जारी कर दिया। बीएसए ने बहाली आदेश में लिखा है कि पहले मामले में जांच के लिए एक माह का समय निर्धारित किया गया था। इसके बाद बीएसए महोदय का अचानक से हृदय परिवर्तन हुआ और उन्हें मामला गंभीर लगा तो तीन दिन में ही जांच पूरी करने का एक और आदेश जारी कर दिया।
बीएसए साहब के हुक्म की तामील हुई। तीन दिन में जांच पूरी कर दी गई और प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद निलंबन तिथि से ही सवेतन बहाल कर दिए गए। यानी उन पर अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन पर लगे सभी आरोप निराधार साबित हुए। नामचीन अखबारों ने जो धंुआ उड़ाया सब बेकार ही साबित हुआ। जान मोहम्मद ने पूरे मामले में खुद को राजनीति से भी दूर रखा।
उन्होंने तटस्थ रहते हुए विभागीय जांच में पूरा सहयोग किया। दुनिया भले उनके बारे में कुछ भी कहती रही लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर कोई अनर्गल टिप्पणी नहीं की। हालांकि इसके बाद भी यह मुद्दा थमता नहीं दिख रहा है। भारत दीप ने पहले ही इस मामले में चुनावों को लेकर कार्रवाई की बता लिखी थी।
शनिवार को मांट के पूर्व विधायक श्यामसुंदर शर्मा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि जान मोहम्मद बीएलओ के रूप में कार्य कर रहे थे। उन पर विशेष वोट काटने का दबाव डाला गया। जब उन्होंने इसके लिए मना किया तो साजिशन निलंबन करा दिया। श्याम सुंदर शर्मा ने पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बताया।
पल-पल बदलते घटनाक्रम के बीच अब सवाल यह है कि अगर जान मोहम्मद एकदम निर्दाेष थे तो उनके निलंबन की कार्रवाई किस जांच के आधार पर की गई। श्यामसंुदर शर्मा ने सवाल उठाया कि जब स्कूल का कोई बच्चा, नौहझील के किसी व्यक्ति ने उनके खिलाफ बयानबाजी नहीं की तो किस आधार पर उन्हें निलंबित कर दिया। उन्होंने मामले में बीएसए पर भी कार्रवाई की मांग की है।