बांग्लादेश में नई सत्ता का सूर्याेदय, आम चुनावों में बीएनपी का बहुमत, रहमान हो सकते हैं नए पीएम
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3 सीटों पर अन्य पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई है। अब 206 सीटों के नतीजे सामने आए हैं। आम चुनाव के लिए दोपहर 2 बजे तक 48% वोटिंग हुईं। मतदान 4ः30 तक चला। अभी कुल मतदान के आंकड़े आने बाकी हैं।
इंटरनेशनल डेस्क। बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को बहुमत मिल गया है। पार्टी ने 299 सीटों में से 165 सीटों पर जीत दर्ज की है। पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे और बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है।
दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार रहमान ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था, दोनों पर उनकी जीत हुई है। रहमान पिछले साल दिसंबर में ही 17 साल बाद देश लौटे थे। वहीं जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 पार्टियों के गठबंधन को अब तक सिर्फ 45 सीटें मिली हैं। जमात चीफ शफीकुर रहमान ने ढाका-15 सीट से जीत दर्ज की है।
3 सीटों पर अन्य पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत हुई है। अब 206 सीटों के नतीजे सामने आए हैं। आम चुनाव के लिए दोपहर 2 बजे तक 48% वोटिंग हुईं। मतदान 4ः30 तक चला। अभी कुल मतदान के आंकड़े आने बाकी हैं।
भारत में रह रहीं पूर्व बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना ने इन चुनाव को पूरी तरह फर्जी और असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद यूनुस ने गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सत्ता पर कब्जा किया और उसी के तहत यह चुनाव कराया गया।
वोटिंग के दौरान झड़पें
बांग्लादेश में वोटिंग के दौरान कई जगहों पर झड़पें भी हुई। खुलना में एक वोटिंग सेंटर के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प में एक BNP नेता मोहिबुज्जमान कोच्चि की मौत हो गई।

दूसरी तरफ मुंशीगंज-3 और गोपालगंज सदर इलाके में वोटिंग सेंटर के बाहर देसी बम फेंके गए। गोपालगंज सदर इलाके में धमाके से 3 लोग घायल हो गए थे। बांग्लादेश चुनाव को लेकर भारत ने नतीजों का इंतजार करने के लिए कहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नतीजे आने के बाद ही यह देखा जाएगा कि जनादेश किस तरह का है।
35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री
बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा। 1988 में काजी जफर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक बांग्लादेश की राजनीति में पूर्व पीएम शेख हसीना और खालिदा जिया का दबदबा रहा। ये दोनों की प्रधानमंत्री बनती रहीं।
शेख हसीना के देश छोड़ने और खालिदा जिया के निधन के बाद यह पहला चुनाव था। शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को इस चुनाव में हिस्सा लेने की इजाजत नहीं दी गई थी। चुनाव आयोग का कहना था कि 2024 में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में पार्टी की भूमिका की वजह से यह फैसला लिया गया था।
रहमान का PM बनना लगभग तय
तारिक रहमान 25 जनवरी को ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे थे। उनकी वापसी के सिर्फ पांच दिन बाद, पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी मां खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की कमान पूरी तरह उनके हाथों में आ गई।
तारिक पर 2001 से 2006 के BNP शासनकाल में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। 2007 में अंतरिम सरकार के दौरान उन्हें 18 महीने जेल में रहना पड़ा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए तारिक 2008 में लंदन भाग गए थे। तब उन्हें उस समय इलाज के लिए देश से बाहर जाने की अनुमति मिली थी। इसके बाद वे देश नहीं लौटे।
टाइम मैगजीन के मुताबिक देश से बाहर रहने के बावजूद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी में तारिक को ही पार्टी का नेता माना जाता रहा। पार्टी की रणनीति, आंदोलन और राजनीतिक लाइन लंबे समय तक उन्हीं के इशारों पर तय होती रही।
तारिक रहमान खुद को शांत, सुनने वाला और पॉलिसी पर फोकस नेता की तरह पेश कर रहे हैं। वे हर साल 5 करोड़ पेड़ लगाने, ढाका में नए ग्रीन जोन बनाने और तकनीकी शिक्षा बढ़ाने की बात करते हैं।