MP: 25 मासूमों के लिए जान न्योछावर करने वाली वीर आंगनवाड़ी सहायिका की यह कहानी आपको जरूर पढ़नी चाहिए
वहाँ मौजूद 55 साल की आंगनबाड़ी सहायिका कंचन बाई मेघवाल ने हालात को भांपा और बच्चों को बचाने दौड़ पड़ीं। उन बच्चों में ने कंचनबाई का एक पोता भी शामिल था।
मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के नीमच ज़िले से साहस और सर्वोच्च बलिदान की ऐसी कहानी सामने आई है जिसे सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। यह वीरता दिखाने वाला कोई नवयुवक या युवती नहीं बल्कि 55 साल की वृद्ध आंगनवाड़ी सहायिका हैं। एक वृद्ध कर्मचारी ने अपने कर्तव्य के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर देश को खुद का ऋणी बना दिया है। सरकार भले ही उनकी इस वीरता को जिस भी तरह सम्मान दे। देशवासियों की नजरों में उनका सम्मान बहुत जरूरी है।
आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के नीमच जिले में ज़िला मुख्यालय से 26 किलोमीटर दूर रानपुर गांव है। यहां पर एक प्राथमिक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है। इस आंगनवाड़ी केंद्र के परिसर में सोमवार दो फ़रवरी की दोपहर मधुमक्खियों के एक झुंड ने हमला कर दिया।

यह मधुमक्खियां वहां लगे हैंडपंप के पास लगे छत्ते से उड़कर आई थीं। परिसर गूंज रही बच्चों की हँसी और शरारतें अचानक चीख पुकार में बदल गई।
ग्रामीण बताते हैं कि क़रीब साढ़े तीन बजे का समय था, जब आंगनबाड़ी के आसपास मौजूद बच्चों पर मधुमक्खियों का झुंड टूट पड़ा। उस वक़्त परिसर में क़रीब 20 से 25 बच्चे थे।
स्कूल की एक शिक्षिका गुणसागर जैन के अनुसार, मधुमक्खियां सीधे बच्चों की ओर बढ़ रही थीं और पूरी तरह से अफ़रा तफ़री का माहौल हो गया था। सब हक्के बक्के होकर असहाय सा महसूस कर रहे थे।
उसी समय वहाँ मौजूद 55 साल की आंगनबाड़ी सहायिका कंचन बाई मेघवाल ने हालात को भांपा और बच्चों को बचाने दौड़ पड़ीं। उन बच्चों में ने कंचनबाई का एक पोता भी शामिल था।
कंचन बाई ने कोई साधन न देखते हुए अपने तन से ही 25 बच्चों को ढंक लिया। उनके इस साहस के कारण मधुमक्खी बच्चों को नहीं छू पाईं लेकिन कंचन बाई के शरीर पर बुरी तरह हमला कर दिया।
स्कूल का स्टाफ और गांव के लोग उन्हें अस्पताल लेकर गए। जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। कंचन बाई तो चली गईं लेकिन 25 बच्चों को नया जीवन दे गईं।
मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए ये खबर सरकार तक भी पहुंची। हजारों मधुमक्खियों के बीच ढाल बनकर खड़ी इस वीरांगना के बलिदान ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया।
प्रदेश सरकार ने दुख की इस घड़ी में उनके परिवार और आश्रितों को आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और अन्य अधिकारियों ने परिवार को तस्सली देते हुए कहा कि कंचन बाई का योगदान आजीवन याद रखा जाएगा। उनकी सेवाओं को सम्मान और स्मृति रूप से हमेशा याद किया जाएगा। इस मुश्किल की घड़ी में सरकार हर संभव सहायता दिलाने की कोशिश कर रही है।

सीएम डॉ मोहन यादव ने ट्विटर पर पोस्ट किया और लिखा कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कंचन बाई के परिवार को तत्काल ₹4 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही कंचन बाई के बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सरकार देगी। मुख्यमंत्री ने लिखा कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और परिवार को इस कठिन समय में साहस प्रदान करें।