पायजामे का नाड़ा खींचना दुष्कर्म की कोशिश, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाईकोर्ट का विवादित फैसला

टीम भारत दीप |

आरोपियों के खिलाफ लगे सख्त आरोपों को भी बहाल कर दिया।
आरोपियों के खिलाफ लगे सख्त आरोपों को भी बहाल कर दिया।

एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह और उसकी 14 साल की नाबालिग बेटी उसकी ननद के घर से लौट रहे थे। इस दौरान उनके गांव के ही पवन, आकाश और अशोक ने उनकी बेटी को मोटरसाइकिल पर घर छोड़ने की पेशकश की।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने पायजामे का नाड़ा खींचने को दुष्कर्म की तैयारी बताया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पायजामे का नाड़ा खींचना दुष्कर्म की कोशिश है। 

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि पायजामे का नाड़ा खींचना और स्तन छूना साफ तौर पर दुष्कर्म की कोशिश है। कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले पर स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई की और 10 फरवरी को उच्च न्यायालय के फैसले को पलटने का आदेश दिया। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पोक्सो कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ लगे सख्त आरोपों को भी बहाल कर दिया। 

दरअसल, यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज का है। 10 नवंबर 2021 को एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि वह और उसकी 14 साल की नाबालिग बेटी उसकी ननद के घर से लौट रहे थे। इस दौरान उनके गांव के ही पवन, आकाश और अशोक ने उनकी बेटी को मोटरसाइकिल पर घर छोड़ने की पेशकश की। 

महिला ने आरोप लगाया कि तीनों आरोपियों ने उसकी बेटी से छेड़छाड़ की और उसके पायजामे का नाड़ा भी खींच लिया। बच्ची की चीख सुनकर दो लोग वहां पहुंचे और उन्हें देखकर तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए। 

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की पीठ ने कहा कि विवादित आदेश आपराधिक न्यायशास्त्र के तय सिद्धांतों के गलत इस्तेमाल के कारण रद्द किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए, पोक्सो कानून के तहत दो आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म की कोशिश के आरोप बहाल कर दिया।

पीठ ने फैसले में कहा, जो तथ्य बताए गए हैं, उन्हें देखते हुए, हम हाईकोर्ट के इस नतीजे से सहमत नहीं हो सकते कि आरोपी सिर्फ दुष्कर्म की तैयारी कर रहे थे, कोशिश नहीं। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों को सिर्फ देखने से ही इस बात में जरा सा भी शक नहीं रह जाता कि आरोपियों ने दुष्कर्म की कोशिश के तय इरादे से ये सब किया। 17 मार्च, 2025 का विवादित फैसला रद्द किया जाता है, और स्पेशल जज, कासगंज का 23 जून, 2023 का असल समन ऑर्डर बहाल किया जाता है।


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