यूपी की कानून व्यवस्था को आखिर हुआ क्या है! पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती ये घटनाएं

टीम भारत दीप |
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आखिर लोगों में कानून को हाथ में लेने की हिम्मत आ कहां से रही है।
आखिर लोगों में कानून को हाथ में लेने की हिम्मत आ कहां से रही है।

क्या यह कोई तीसरी आंख है जिसकी नजर उत्तर प्रदेश को लगी है। कहीं ये योगी के शासन काल पर चुनाव से पहले धब्बा लगाने की रणनीति है या वाकई पुलिस का इकबाल इतना कम हो गया है कि आम आदमी अपने इंतकाम के लिए हथियार उठाने पर मजबूर है।

यूपी डेस्क। उत्तर प्रदेश को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में भयमुक्त और अपराध मुक्त कहा जाने लगा है। योगी की पुलिस का इकबाल ऐसा है कि अपराधी प्रदेश छोड़कर भाग चुके हैं या अपराध छोड़कर रोजी-रोटी के धंधे में लग गए हैं। ऐसा कोई और नहीं खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार मंचों पर कह चुक हैं। 

उत्तर प्रदेश पुलिस भी मुख्यमंत्री का ‘ठोंक दो‘ का इशारा भली भांति समझती है। योगी आदित्यनाथ के पिछले मुख्यमंत्री काल को देखें तो उसके मुकाबले इस बार जैसे-जैसे प्रदेश विधानसभा चुनाव की तरफ बढ़ रहा है, यूपी में कानून व्यवस्था की पकड़ कमजोर नजर आने लगी है। हाल ही में हुई घटनाएं इस बात की तस्दीक करती हैं कि कहीं न कहीं सिस्टम में सेचुरेशन की स्थिति है। 

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में एक कॉलेज के भीतर छात्र की दिनदहाड़े हत्या का मामला हो या राष्ट्रपति के दौरे के बीच मथुरा में एक गौरक्षक की मौत पर भीड़ का बेकाबू होकर हाईवे पर तांडव करना, इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आखिर लोगों में कानून को हाथ में लेने की हिम्मत आ कहां से रही है। 

क्या यह कोई तीसरी आंख है जिसकी नजर उत्तर प्रदेश को लगी है। कहीं ये योगी के शासन काल पर चुनाव से पहले धब्बा लगाने की रणनीति है या वाकई पुलिस का इकबाल इतना कम हो गया है कि आम आदमी अपने इंतकाम के लिए हथियार उठाने पर मजबूर है।     

यूपी कॉलेज मर्डर
वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज में 20 मार्च को बीए फर्स्ट ईयर के छात्र मंजीत चौहान ने अपने सीनियर बीएससी सेकंड ईयर के छात्र सूर्य प्रताप सिंह की सात गोलियां मारकर हत्या कर दी। यह घटनाक्रम दिनदहाड़े कॉलेज परिसर में हुआ। मंजीत और सूर्य प्रताप दोनों की रैगिंग को लेकर तनातनी थी। मंजीत ने इसकी शिकायत कॉलेज प्राचार्य से भी की।

इस पर सूर्य प्रताप को कॉलेज में डांटा भी गया। इसके बावजूद मंजीत की इतनी हिम्मत बढ़ी कि वह बाहर से पिस्टल ले आया और दिनदहाड़े सभी के सामने कॉलेज में अपने सीनियर छात्र की हत्या कर दी। बताया गया है कि इससे पहले सूर्य प्रताप और उसके साथियों ने दो बार मंजीत की पिटाई भी की थी। 

पुलिस ने आरोपी मंजीत को छह घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। जरूरी कानूनी कार्रवाई भी जारी है लेकिन सवाल यह है कि बीए में पढ़ने वाले छात्र के भीतर यदि पिस्टल उठाने की हिम्मत आ रही है तो यह कानून का घटता खौफ नहीं तो क्या है?

मथुरा में फरसा बाबा की मौत पर उपद्रव

वाराणसी की घटना के दूसरे दिन ही मथुरा के छाता में सुबह एक घटना घटी जिसमें एक गौरक्षक की ट्रक से कुचलकर मौत हो गई। क्षेत्र में फरसा वाले बाबा के नाम से विख्यात चंद्रशेखर यादव मूल रूप से फिरोजाबाद के सिरसागंज के रहने थे। कई सालों से वे मथुरा के आजनौंख में रहकर गोवंश की रक्षा के लिए कार्य कर रहे थे। 

 

उनकी अपनी एक गौशाला थी जिसमें वे बेसहारा गायों की सेवा आदि करते थे। फरसा लेकर चलने के कारण उनकी ख्याति फरसा वाले बाबा के रूप में थी। बाबा का अपना एक समूह था तो गो हत्या रोकने के लिए कार्य कर रहा था। इसके लिए जब उन्हें सूचना मिलती कि कोई गोवंशों को पकड़कर वध के लिए ले जा रहा है तो वे स्वयं तलाशी और बरामदगी के लिए चल देते।

21 मार्च शनिवार को भी वे तड़के चार बजे नागालैंड नंबर के एक ट्रक की तलाशी ले रहे थे, उसी दौरान पीछे से आए राजस्थान नंबर के ट्रक ने उनको टक्कर मार दी। हादसे में मौके पर ही बाबा की मृत्यु हो गई। बाबा के समर्थकों का आरोप रहा कि उनकी हत्या साजिश के तहत की गई है लेकिन पुलिस इसे हादसा बताती रही। 

उसी दिन देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गोवर्धन की परिक्रमा कर रही थीं। पूरा अमला उनकी सुरक्षा में तैनात था। ईद का त्यौहार होने के कारण फोर्स बंटी हुई थी। इसी बीच फरसा वाले बाबा के समर्थकों ने दिल्ली आगरा नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया। वाहनों में तोड़फोड़ की गई। करीब 4 घंटे हाईवे जाम रहा। मदद के लिए सेना की भी सहारा लेना पड़ा। 

ऐसे में सवाल है कि भयमुक्त प्रदेश की जनता का आखिर पुलिस से विश्वास उठ गया है कि जो खुद ही न्याय के लिए कानून अपने हाथ में लेने लग गई है। यह पुलिस का घटता इकबाल नहीं तो क्या है?

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