यूपी की सियासत: अखिलेश यादव ने बदली रणनीति अब सड़क से लेकर विधानसभा तक सरकार को करेंगे असहज

टीम भारत दीप |

अखिलेश यादव को जमीन पर दिखने वाले काम करने होंगे।
अखिलेश यादव को जमीन पर दिखने वाले काम करने होंगे।

इस बार मिली हार के सबक से सीखते हुए अखिलेश यादव ने फैसला किया हैं कि वह अपने कोर वोटर्स को पार्टी से जोड़े रखने के लिए सरकार को हर मुद्दे पर घेरने के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक कोई मौका नहीं छोड़ेंगे। बात अगर पिछले पांच साल की करें तो सपा ने एक बार भी सरकार को असहज नहीं किया।

लखनऊ। यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में करारी हार झेलने के बाद अखिलेश यादव अब समझ गए है, उन्हें कैसी राजनीति करनी है। पिछले पांच साल की बात की जाए तो अखिलेश यादव सड़क से ज्यादा सोशल मीडिया पर सक्रिय रहे है, लेकिन उनके मतदाता सोशल मीडिया फ्रेंडली नहीं है।

ऐसे में अखिलेश यादव सपा की सड़क वाली राजनीति फिर करने की तैयारी में है। अब अखिलेश यादव पूरा ध्यान केवल यूपी में लगाना चाहते है, इसलिए उन्होंने संसद से इस्तीफा देकर नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने के लिए खुद को यूपी में रखा इसके साथ ही सड़क पर उतरकर हर मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की तैयारी में है।

 पिछली हार के बाद चले गए थे दिल्ली

आपकों बता दें कि 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव के हाथ से सजत्ता चली गई तब उन्होंने कुछ समय तक विधान परिषद में बिताया इसके बाद वह नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी अहमद हसन को दी। बाद में आजगमढ़ से लोकसभा चुनाव लड़कर दिल्ली निकल गए।

इधर, कुछ वर्षों में यूपी में सीएम रह चुके नेता के लिए यही परंपरा मानी जाती है। हालांकि 2007 में मायावती के मुख्यमंत्री बनने के शुरुआती दो साल तब के निवर्तमान मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव नेता प्रतिपक्ष रहे। उसके बाद उन्होंने भी यह जिम्मेदारी अपने छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव को सौंप दी।

मतदाताओं को बांधकर रखने का प्रयास

इस बार मिली हार के सबक से सीखते हुए अखिलेश यादव ने फैसला किया हैं कि वह अपने कोर वोटर्स को पार्टी से जोड़े रखने के लिए सरकार को हर मुद्दे पर घेरने के लिए सड़क से लेकर विधानसभा तक कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।

बात अगर पिछले पांच साल की करें तो सपा ने एक बार भी सरकार को असहज नहीं किया। हर मौके पर प्रियंका गांधी ने सरकार को असहज किया। अगर ​देखा जाए सपा पिछलग्गू पार्टी हो गई थी जो किसी के मुद्दे उठाने के बाद उसे भुनाने के में जुट जाती थी।

हाथरस का मामला हो, लखीमपुरखीरी या आगरा हर जगह वह कांग्रेस के पास पहुंचे ​थे। वहीं अब अखिलेश यादव की रणनीति है कि वह हर मौकों पर अपने कार्यकर्ताओं को लेकर प्रदर्शन करेंगे, आंदोलन करेंगे जिससे वोटर्स में पार्टी की पकड़ मजबूत रहे। 

 कांग्रेस को लगेगा झटका

अगर योगी सरकार को पिछले पांच साल किसी ने परेशान किया है तो वह है कांग्रेस, लेकिन कांग्रेस उतनी असरदार साबित नहीं हो पाई, अब अखिलेश यादव कांग्रेस की राह पर चलेंगे। अखिलेश यादव के इस कदम से कांग्रेस की जमीन और खिसक जाएगी, क्योंकि कांग्रेस के लिए यह कहावत सटिक बैठी की सौ दिन चले अढ़ाई कोश, मतलब कांग्रेस के सारे प्रयास विफल हो गए।

ऐसे में दो पार्टियां जब एक जैसी रणनीति से चलेंगी जो ज्याद सक्रिय रहेगी उसे ज्यादा फायदा मिलेगा। अगर वोट प्रतिशत के हिसाब से देखा जाए तो सपा का वोट प्रतिशत सबसे ज्यादा बढ़ा है ऐसे में इस बढ़त को बनाए रखने के लिए  अखिलेश यादव को जमीन पर दिखने वाले काम करने होंगे। 

इस बार विधानसभा चुनाव में वोट प्रतिशत और सीटों के लिहाज से सपा सबसे ज्यादा फायदे में रही। पर, अखिलेश भलीभांति जानते हैं कि अपने अब तक के सर्वाधिक मत प्रतिशत की स्थिति को बनाए रखना उनके लिए कम बड़ी चुनौती नहीं है।

लोकसभा चुनाव में मतदाताओं का मनोविज्ञान विधानसभा चुनाव से इतर रहने के कई उदाहरण हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि अखिलेश यूपी की राजनीति में सड़क से सदन तक सक्रिय रहे तो वे भाजपा के साथ न जाने वाले मतदाताओं के वर्ग या समूह को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर भी काम करेंगे। 

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