‘क्योंकि मैं बेटी हूं’ के मंचन ने झकझोरा, ‘कोरोना तेरी खैर नहीं’ का मंचन दे गया संदेश

टीम भारतदीप |
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महिलाओं और बेटियों के सम्मान व सुरक्षा की शुरूआत घर से ही होनी चाहिए।
महिलाओं और बेटियों के सम्मान व सुरक्षा की शुरूआत घर से ही होनी चाहिए।

राजधानी के पत्रकारपुरम व फन माॅल के पास आयोजित कार्यक्रम के तहत महिला सशक्तिकरण और महिला अपराध पर समाज को बेहतर संदेश देते हुए दो नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया।

लखनऊ। आधी आबादी का दर्द जब मुखर हुआ तो आवाज कुछ इस तरह उठी, ‘‘औरतें उठी नहीं तो जुल्म बढ़ता जाएगा, जुल्म करने वाला सीना जोर बनता जाएगा।’’ इस गीत ने जहां महिलाओं में नया जोश भर दिया तो वहीं महिलाओं को समाज में बराबरी का हक देने के साथ ही उचित सम्मान देने की भी वकालत की। 

बात हो रही है मिशन शक्ति के तहत पुलिस कमिश्नरेट और वामा सारथी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की। कार्यक्रम में लखनऊ पुलिस कमिश्नर सुजीत पाण्डेय ने कहा कि महिलाओं और बेटियों के सम्मान व सुरक्षा की शुरूआत घर से ही होनी चाहिए। 

राजधानी के पत्रकारपुरम व फन माॅल के पास आयोजित कार्यक्रम के तहत महिला सशक्तिकरण और महिला अपराध पर समाज को बेहतर संदेश देते हुए दो नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया। 

वरिष्ठ रंगकर्मी डा. सीमा मोदी के नाट्य निर्देशन में पहला मंचन ‘क्योंकि मैं बेटी हूं’ का हुआ जिसमें बचपन से ही घर में असामानता और दुर्भावना का दंश झेल रही बेटियों के दर्द को बड़े ही मार्मिक अंदाज में प्रस्तुत किया गया।

इस गीत ‘औरतें उठी नहीं तो जुल्म बढ़ता जाएगा। जुल्म करने वाला सीना जोर बनता जाएगा।।’ से शुरू हुए मंचन में एक के बाद एक लड़कियां अपनी समस्याओं को प्रस्तुत करती हैं। इसके बाद सभी लड़के एक-एक करके लड़कियों की अपेक्षाकृत अपने आप को बेहतर प्रस्तुत करते हुए लड़कों और लड़कियों के बीच समाज में अंतर प्रस्तुत करते हैं। 

समाज को संदेश देने के लिए एक दांपत्य जीवन को दर्शाया जाता है। इसमें एक पुरुष प्रधान समाज महिलाओं को किस तरह से कमजोर समझ कर प्रताड़ित करता है और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाता है स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया गया। अंत में ‘लड़की-लड़का एक समान’ बदली है सोच हमारी हर नारी का हो सम्मान...  बदली है सोच हमारी .. ।’ के साथ नाटक समाज को बेहतर संदेश देता नजर आता है। 

अगले मंचन का शीर्षक था ‘कोरोना तेरी खैर नहीं’। यहां मंचन के माध्यम से कोरोना को लेकर जागरूकता बढ़ाते हुए उसके खिलाफ एक नए आगाज का भी आरंभ किया गया। दोनों ही मंचनों को लोगों ने खूब पसंद किया और कलाकारों की हौसलाअफजाई करते हुए जमकर तालियां बजाई। 

मंचन में युवराज, सिंह,-दीपक कुमार -विपुल यादव-महादेव सिंह मनोज सिंह-धर्मेंद्र सिंह-निखिल यादव-रजत द्विवेदी,आशीष कुमार-, रोहित प्रताप सिंह आदि कलाकरों ने अपने उम्दा अभिनय से जीवंतता प्रदान की। 

नेपथ्य में सौम्या मोदी की भूमिका भी सराहनीय रही। नाट्य निर्देशन कर रहीं वरिष्ठ रंगकर्मी सीमा मोदी ने बताया कि इस प्रस्तुति के लिए पंद्रह दिन का वर्कशॉप किया गया था, ये अभियान आगे निरंतर चलता रहेगा। नाटक का सह निर्देशन व संगीत निर्देशन, इंदर व सोमेंद्र का रहा।


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