महिलाओं के मुकाबले पुरूषों पर भारी कोरोना का कहर, शोध में हुआ ये नया खुलासा

टीम भारत दीप |
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मौत के मामले में भी पुरुषों की संख्या महिलाओं से करीब तीन गुना अधिक है।
मौत के मामले में भी पुरुषों की संख्या महिलाओं से करीब तीन गुना अधिक है।

मध्यप्रदेश स्थित इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के शोधार्थी द्वारा की गई रिसर्च में ऐसा दावा किया गया है कि कोरोना के खतरे की इस भिन्नता की वजह महिला और पुरुषों में उनके लिंग के अनुसार पाए जाने वाले अलग-अलग हार्मोन हैं।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। कोरोना वायरस भले ही देश,राज्य,शहर,धर्म व जाति देखकर लोगों को अपना शिकार न बना रहा हो लेकिन यह लिंग भेद जरूर कर रहा है। यह बात भारत में किए गए एक शोध में सामने आई है।

दरअसल दुनिया भर की रिसर्च और आंकड़ों के मुताबिक कोरोना पुरुषों और महिलाओं के बीच फर्क कर रहा है। यह महिलाओं के मुकाबले पुरूषों को ज्यादा शिकार बना रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मिली जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश स्थित इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के शोधार्थी द्वारा की गई रिसर्च में ऐसा दावा किया गया है कि कोरोना के खतरे की इस भिन्नता की वजह महिला और पुरुषों में उनके लिंग के अनुसार पाए जाने वाले अलग-अलग हार्मोन हैं।

बताया गया कि विश्वविद्यालय के इस शोध निष्कर्ष को जाने-माने अमेरिकी जर्नल करंट कैंसर ड्रग टारगेट्स के ताजा अंक में भी प्रकाशित हुआ है।

दरअसल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के शोध टीम के प्रमुख डॉ. हमेंद्र सिंह परमार के मुताबिक ग्लोबल हेल्थ 5050, जो स्वास्थ्य क्षेत्र में लैंगिक भेदभाव के खिलाफ काम करती है और आंकड़े जुटाती है। बताया गया कि उसने 50 देशों के कोरोना के आंकड़े जारी किए थे।

इसमें बताया गया कि नवंबर 2020 तक कोरोना से मरने वालों के साथ ही गंभीर मामलों में पुरुषों की संख्या महिलाओं के मुकाबले कहीं अधिक थी। वहीं मौत के मामले में भी पुरुषों की संख्या महिलाओं से करीब तीन गुना अधिक है। इसमे बताया गया कि महिलाओं में कोविड से मौत की खतरा करीब तीन गुना कम है।

कहा गया कि ब्रेस्ट कैंसर की दवाओं और उपचार के प्रबंध के शोध के दौरान हमने कोविड के असर को भी अध्ययन का विषय बनाया। चूंकि पहले से ही कैंसर, मधुमेह और दिल की बीमारी से पीड़ितों को कोरोना संक्रमण के खतरे के मामले में पहले पायदान पर रखा गया था।

वहीं दुनियाभर में प्रमुख रूप से हुए 250 शोधों के आंकड़ों की तुलना और अध्ययन के बाद देखने में आया कि कोरोना संक्रमण के असर में महिलाओं में पाया जाने वाला हार्मोन एस्ट्रोजन और पुरुषों में पाया जाने वाला हार्मोन टेस्टेस्टोरॉन अलग-अलग भूमिका अदा कर रहे हैं। बताया गया कि स्त्री हार्मोन एस्ट्रोजन कोरोना संक्रमण और गंभीरता का खतरा कम कर रहा है।

इसी क्रम में डा. परमार के मुताबिक कोरोना किसी भी मानव शरीर में एसीई-2 रिसेप्टर के जरिए इंट्री करता है। एस्ट्रोजन शरीर में एसीई-2 रिसेप्टर की संख्या कम कर देता है। वहीं पुरुष हार्मोन इस रिसेप्टर को शरीर में बढ़ाता है। एसीई-2 रिसेप्टर कम होने से कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा महिलाओं में कम हो जाता है।

इसके साथ ही एस्ट्रोजन से शरीर में घुलनशील एसीई-2 रिसेप्टर ज्यादा बनते हैं। बताया गया कि स्त्री हार्मोन शरीर को एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजनरोधी) क्षमता भी ज्यादा देता है। इसी कारण महिलाओं की दर्द सहने की क्षमता से लेकर इम्युनिटी भी बेहतर होती है। यही स्त्री हार्मोन महिलाओं में कोरोना का खतरा और गंभीरता को कम कर रहा है।

वहीं पुरुषों में उनका हार्मोन टेस्टेस्टोरॉन बढ़ा देता है। शोध में बताया गया​ कि कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में महिलाओं की संख्या तीन गुना कम है। बताया गया कि संक्रमण के बाद भी महिलाओं के हार्मोंन ही हैं, जो पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कोरोना की गंभीरता को कम करते हैं।


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