यूपी में 9 से 9 छूट, पर ​इस ज़िले में बहुत कन्फूजन है भाई !

टीम भारत दीप |
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सुबह 10 बजे के बाद से दोपहर 3 बजे तक लोग घरों से बाहर ही नहीं निकलना चाहते हैं। ऐसे में बाज़ार कौन जाना चाहेगा।
सुबह 10 बजे के बाद से दोपहर 3 बजे तक लोग घरों से बाहर ही नहीं निकलना चाहते हैं। ऐसे में बाज़ार कौन जाना चाहेगा।

इसी दिक्कत को लोगों ने डीएम के ट्वीटर पर ट्वीट करके भी बताया लेकिन इसके बावजूद इन नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

जौनपुर। कोरोना वायरस के दौर में लोग जितना अपनी रोज़ी—रोटी के लिए परेशान हैं। उससे कहीं ज़्यादा रोज़—रोज़ के नए—नए नियमों से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। बात अगर यूपी के जौनपुर ज़िले की ही कर ली जाए तो यहां लॉकडाउन के समय को लेकर लोगों में बहुत असंतोष की स्थिति है। लोग इसे अव्यवहारिक भी बता रहे हैं। कई यूज़र ने डीएम के टैग करते हुए इसको लेकर ट्वीट भी किया है। आइए समझातें हैं क्या है पूरा माजरा। 

गौरतलब है कि कोरोना वायरस की वजह से उत्तर प्रदेश में इन दिनों शनिवार और रविवार का दो दिनी साप्ताहिक लॉकडाउन का ओदश राज्य सरकार ने दिया है। इसी के साथ ही बाकी दिनों के लिए गाइडलाइन भी जारी की है, जिसमें सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक बाज़ार खुलने का निर्देश है। साथ रात 10 से सुबह पांच तक पूरी तरह से कफर्यू लग जाता है। ये नियम लगभग प्रदेश के सभी जिलों में लागू है। कहीं कुछ जिलों में कोरोना केस ज़्यादा होने की वजह से इस ढील में कुछ सख्ती भी देखने को मिल रही है। 

ज़िले में नियम लोगों के लिए बना परेशानी
जौनपुर में डीएम दिनेश कुमार सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आदेश में अपने स्तर से तब्दीली कर रखी है। हालांकि ये तब्दीली राज्य सरकार की ओर से बुधवार को जारी गाइडलाइन से पहले ही चली आ रही है। डीएम ने यहां पर रात 9 बजे की बजाय शाम 5 बजे से लॉकडाउन लगाने का नियम बना रखा है। इसके चलते लोगों को काफी ज़्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी दिक्कत को लोगों ने डीएम के ट्वीटर पर ट्वीट करके भी बताया लेकिन इसके बावजूद इन नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इतना ही नहीं बहुत से लोग जिन्हें यूपी सरकार के नियमों के बारे पता है और ज़िले दूसरा नियम है, उन्हें इसको लेकर भी बहुत कंन्फूयज़न है। 

ट्वीट में लोगों ने क्या कहा
पिंटू कुमार नाम के एक यूज़र ने लिखा कि 'इस गर्मी में सुबह 10 बजे के बाद से दोपहर 3 बजे तक लोग घरों से बाहर ही नहीं निकलना चाहते हैं। ऐसे में बाज़ार कौन जाना चाहेगा। अन्य शहर में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक की छूट है। यहां शाम 7 बजे ही तक छूट दें'। उन्होंने डीएम से यहां जारी रोस्टर पर विचार करने का आग्रह किया है। इसी तरह उन्होंने एक और ट्वीट में लिखा कि 'होटल वाले सुबह 10 बजे होटल खोलने की तैयारी शुरू करते हैं और खोलते—खोलते दो घंटे बीत जाते हैं। जबकि बंद करने में भी उन्हें इतना ही समय लगता है। ऐसे में 3 घंटे के होटल खोलने का क्या फायदा ह़ै'। एक अन्य यूज़र ने लिखा 'सर 5 बजे की जगह 7 बजे अच्छा रहेगा'।

व्यावहारिक नहीं है ये नियम
वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के ज़िला सह सचिव जेपी कामरेड ने कहा कि 'यह नियम व्यावहारिक नहीं है। इससे सबसे ज़्यादा दिक्कत मज़दूर तबका लोगों को हो रही है। दिहाड़ी मज़दूर मज़दूरी करके 6 बजे खाली होता है। तब तक बाज़ार बंद हो जाता है, वो कैसे ख़रीदारी करेगा। इतना ही नहीं 5 बजे के बाद पुलिसकर्मी भी उत्पीड़न करते हैं, मज़दूरों को घर जाते समय डंडे से उनकी पिटाई तक की जाती है। यदि मास्क नहीं लगाया तो 500 रुपये का आर्थिक दंड लगाया जा रहा है जबकि प्रशासन को चाहिए कि वो 20, 25 रुपये का मास्क उन्हें वितरित करे। प्रताड़ित करना कतई ठीक नहीं है'। 

पुलिसकर्मी कर रहे लोगों को परेशान
ये बात भी फैक्ट है कि लॉकडाउन के नियमों को पालन कराने की ज़िम्मेदारी पुलिसकर्मियों पर ही है। वह ख़तरों से खेलकर ये काम कर भी रहे हैं। हालांकि सच्चाई ये भी है कि वह लोगों का उत्पीड़न भी कर रहे हैं। यदि कहीं कोई 5 बजे के बाद ज़रूरी काम से गया है तो बिना पूछताछ के ही कई बार उस पर डंडे बरसने लगते हैं। यहां भी मज़दूर परेशान हो रहे हैं, उनका तो काम ही 6 बजे खत्म होता है। ऐसे में जब वो घर लौट रहे होते हैं तो उनकी पिटाई अक्सर होती है। अब बेचारा मज़दूर कहां से आईकार्ड दिखाए कि वो मज़दूरी करके आया है। 


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