आरबीआई ने सरकार की झोली में डाले 57 हजार करोड़, राजकोषीय घाटा 6 लाख करोड़ के पार

टीम भारत दीप |
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सरकार ने आरबीआई पर अधिक भुगतान का दबाव बनाया है।
सरकार ने आरबीआई पर अधिक भुगतान का दबाव बनाया है।

आरबीआई ने 2019-20 जुलाई से जून के बीच अपने लाभांश में से 57,128 करोड़ रुपये सरकार को देने का निर्णय बोर्ड मीटिंग में लिया।

मुंबई। भारत के केंद्रीय बैंक रिर्जव बैंक आॅफ इंडिया ने सरकार को अपने वार्षिक लाभांश में से 57,128 करोड़ रूपये सौंप दिए हैं। इससे सरकार को अपने राजकोषीय घाटे से उबरने में थोड़ी राहत की उम्मीद है। हालांकि वर्ष 2020-21 के बजट में आरबीआई और अन्य वित्तीय संस्थानों से 60 हजार करोड़ के लाभांश की उम्मीद की गई थी। 

आरबीआई ने 2019-20 जुलाई से जून के बीच अपने लाभांश में से 57,128 करोड़ रुपये सरकार को देने का निर्णय बोर्ड मीटिंग में लिया। गुरूवार को गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में इसका निर्णय लिया गया। 

अपनी 584वीं बोर्ड मीटिंग में आरबीआई ने अपने कान्टिेजेंसी रिस्क बफर को 5.5 प्रतिशत तक सीमित रखने का निर्णय लिया। इसी के साथ कोरोना संकट के बाद देश में उपजे आर्थिक हालातों के बाद सरकार को यह रकम देने का निर्णय हुआ। आरबीआई का यह कदम उस समय है जब सरकार का राजकोषीय घाटा अप्रैल और जून के बीच 6 लाख करोड़ के पार चला गया है।  

रिजर्व बैंक हर साल सरकार को उसकी वित्तीय आवश्यकताओं के लिए अपने लाभांश में से धनराशि देता है, लेकिन बीते कुछ सालों से सरकार ने आरबीआई पर अधिक भुगतान का दबाव बनाया है। बीते साल ही आरबीआई ने अपने पास से 1.76 लाख करोड़ रुपये सरकार को सौंपे थे। 

बीते वित्तीय वर्ष में 3.3 के मुकाबले इस साल सरकार का राजकोषीय घाटा मार्च 2021 तक 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण कोराना के बाद टैक्स जमा करने में भी कमी और सरकार का खर्च है। 

इस साल कोरोना संकट के कारण देश बीते चालीस साल के अपने सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। कोरोना संकट खत्म होने के बाद ही इसमें सुधार की कोई उम्मीद है। 


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