छात्रवृत्ति घोटाला: 27 निजी आईटीआई को डाला गया ब्लैक लिस्ट में, सभी से होगी वसूली

टीम भारतदीप |

मथुरा के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी व तीन अन्य कर्मियों पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।
मथुरा के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी व तीन अन्य कर्मियों पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।

सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाते हुए प्रदेश के 27 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है। साथ ही सभी के खिलाफ FIR के निर्देश भी दिए गए हैं। बता दें घोटाले में 25 अन्य निजी ITI की मिलीभगत का भी खुलासा हुआ है। जिसको ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी चल रही है।

लखनऊ। भले ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात करती रही हो, बावजूद इसके घोटालेबाज अभी भी अपने काम को अंजाम देने में बेखौफ बने हुए है। जिसका जीता जागता उदाहरण यूपी के मथुरा में हुए 23 करोड़ रुपए के छात्रवृत्ति घोटाले के रूप में सामने है।

हालांकि मामला खुलने के बाद से सीएम योगी आदित्यनाथ काफी नाराज हैं और सख्त रूख अपनाने की बात की जा रही है। इसी बीच सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाते हुए प्रदेश के 27 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है। साथ ही सभी के खिलाफ FIR के निर्देश भी दिए गए हैं।

बता दें घोटाले में 25 अन्य निजी ITI की मिलीभगत का भी खुलासा हुआ है। जिसको ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी चल रही है। सभी संस्थानों से घोटले की रकम वसूली की भी बात कही जा रही है। वहीं सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने इस घोटाले को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

उन्होंने घोटाले में निलंबित मथुरा के जिला समाज कल्याण अधिकारी करुणेश त्रिपाठी व तीन अन्य कर्मियों पर केस दर्ज कराने के आदेश दिए गए हैं।

इनसे भी घोटाले की रकम की वसूली होगी। बताते चलें कि निजी आईटीआई संस्थाओं ने फर्जी अभिलेखों से छात्र-छात्राओं का ब्योरा तैयार किया और अपने पाठ्यक्रमों में सीटों की संख्या कई गुना बढ़ाकर दिखाई फिर परीक्षा फॉर्म भी फर्जी ब्योरे से भरवाए और परीक्षा भी दिलावा दी गई।

इसके बाद सरकारी छात्रवृत्ति और फीस प्रतिपूर्ति का लाभ उठाया गया। वहीं मामले में समाज कल्याण विभाग के निदेशक बालकृष्ण त्रिपाठी का कहना है कि जांच के दायरे में आईं आईटीआई संस्थाओं को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया।

संतोषजनक उत्तर न मिलने के बाद उन्हें ब्लैक लिस्ट में डालकर एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है।


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