क्या नियमों से भी आगे निकला बैंक ऑफ बड़ौदा!, कागजों में ट्रांसफर, हकीकत में मनमानी

टीम भारत दीप |

बैंक ऑफ बड़ौदा में नीति के उल्लघंन के मामले सबसे ज्यादा हैं।
बैंक ऑफ बड़ौदा में नीति के उल्लघंन के मामले सबसे ज्यादा हैं।

वरिष्ठता के आधार पर रोटेशनल ट्रांसफर करने, ट्रांसफर के लिए एक पारदर्शी ऑनलाइन प्लेटफार्म स्थापित करने, स्केल-3 अफसरों की भाषायी आधार पर तैनाती, पत्नी की पोस्टिंग, मैटरनिटी, बच्चे की देखभाल आदि कई गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश बैंकों को दिए गए हैं।

बैंकिंग। भारत में विधि द्वारा स्थापित शासन की व्यवस्था है। विधि का अर्थ है कानून। मगर, भारत में ही सरकारी क्षेत्र का एक ऐसा बैंक है जहां का प्रबंधन खुद को कानून से बढ़कर देखने का लगा है। 

आज जहां बैंकों में हर सुविधा डिजिटल होने के दावे किए जाते हैं। वहीं आज तक इस बैंक की खुद की व्यवस्थाएं ही कागजों पर दौड़ रही हैं। बैंककर्मी परेशान हैं। सवाल यह है कि पीर किससे कहें, जल में रहकर मगर से बैर भी तो नहीं किया जा सकता। 

बात तब खुली जब ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन यानी एआईबीओए ने भारत सरकार के वित्त विभाग को एक पत्र लिखा। यह पत्र 9 मार्च को एसोसिएशन महासचिव एस नागराजन की ओर से वित्त मंत्रालय के वित्त विभाग को लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि बैंक ऑफ बड़ौदा अपने कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए सरकार द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहा है। 

उन्होंने वित्त विभाग से मामले में जल्द ही हस्तक्षेप की मांग की जिससे कि कर्मचारियों के अधिकारों का हनन न हो सके। बैंकों के विषयों को लेकर लिखने वाले पोर्टल हैलोबैंकर के अनुसार सरकार ने सरकारी क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों के ट्रांसफर लिए कुछ गाइडलाइन जारी की हैं। 

इसमें वरिष्ठता के आधार पर रोटेशनल ट्रांसफर करने, ट्रांसफर के लिए एक पारदर्शी ऑनलाइन प्लेटफार्म स्थापित करने, स्केल-3 अफसरों की भाषायी आधार पर तैनाती, पत्नी की पोस्टिंग, मैटरनिटी, बच्चे की देखभाल आदि कई गाइडलाइन का पालन करने के निर्देश बैंकों को दिए गए हैं। 

इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण यह है कि यदि कोई कर्मचारी अपने ट्रांसफर आदेश के खिलाफ अपील करना चाहे तो वह भी कर सके। ऐसे कई नियम हैं जिन्हें लेकर बैंकों को कार्य करना है। 

बैंक ऑफ बड़ौदा में कार्य रहे एक वरिष्ठ प्रबंधक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्थानांतरण का आलम यह है कि एक व्यक्ति सालों से एक ही जगह कार्य कर रहा है और उसे डेप्यूटेशन पर दिखा दिया जाता है। 

कागजों में ट्रांसफर आदेश जारी हो रहे हैं लेकिन संबधित व्यक्ति उसी जगह तैनात है। कई मामले ऐसे हैं जहां लोग ज्वाइनिंग के बाद से हिले भी नहीं हैं और उसी जगह काम कर रहे हैं। 

एआईबीओए ने अपने पत्र में लिखा है कि बैंक ऑफ बड़ौदा में सरकार द्वारा निर्धारित नीति के उल्लघंन के मामले सबसे ज्यादा हैं। इसके लेकर बैंक के अधिकारियों में रोष भी व्याप्त हैं और उन्होंने ट्रांसफर प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने की मांग भी की है। पूरे मामले में वित्त विभाग से मांग की कई है कि वे बैंक को स्पष्ट दिशा-र्निदेश प्रदान करें। 


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