आयुर्वेद में 'लौंग' का है अहम स्थान, फायदे जानकार रह जाएंगे हैरान

टीम भारत दीप |

लौंग पौरुष शक्ति और स्टैमिना को भी बढ़ाता है।
लौंग पौरुष शक्ति और स्टैमिना को भी बढ़ाता है।

लौंग में पाए जाने वाले तत्वों की बात करें तो इसमें विटमिन-B1,B2,B4,B6,B9 और विटमिन-सी तथा बीटा कैरोटीन जैसे तत्व शामिल होते हैं। साथ ही विटमिन-K, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट भी लौंग में पाया जाता है।

हेल्थ डेस्क। लौंग (Clove) का आयुर्वेद में अपना महत्व बताया गया है। मसाले के रूप में इसका उपयोग होता है। सेहत के लिए इसे बहुत लाभकारी बताया गया है। लौंग  कई तरह की बीमारियों से भी बचाने में अहम रोल निभाता है। खासकर पुरुषों के लिए लौंग का सेवन चमत्कारिक फायदे दे सकता है। बताया जाता है कि इसके नियमित इस्तेमाल से आप स्टैमिना भी बढ़ा सकते हैं।

दरअसल लौंग में पाए जाने वाले तत्वों की बात करें तो इसमें विटमिन-B1,B2,B4,B6,B9 और विटमिन-सी तथा बीटा कैरोटीन जैसे तत्व शामिल होते हैं। साथ ही विटमिन-K, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट भी लौंग में पाया जाता है।

रोज 3 लौंग का करें सेवन 

डॉक्टर अबरार मुल्तानी के मुताबिक एक शोध में किए गए दावे के अनुसार, आप खाली पेट 3 लौंग का सेवन कर सकते हैं। रात को सोने से पहले भी लौंग को खाया जा सकता है। बताया गया कि जिन पुरुषों को यौन संबंधित कोई समस्या है, उन्हें लौंग का सेवन जरूर करना चाहिए। लौंग कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और जिंक जैसे खनिज से भरपूर होता है।

बताया गया कि यह सभी सेहत के लिए जरूरी तत्व माने जाते हैं। वहीं हेल्थ विशेषज्ञों का भी मानना है कि लौंग पौरुष शक्ति और स्टैमिना को भी बढ़ाता है।

लौंग के सेवन से होने वाले अन्य फायदे

बताया जाता है कि लौंग फाइबर से भरा होता है। ये व्यक्ति के पाचन स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। वहीं डायबिटीज मरीजों के लिए भी लौंग बेहतर माना जाता है। लौंग पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ाती है, जो पाचन संबंधी विकारों को रोकती है। वहीं लौंग शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में भी मददगार होता है। लौंग का सेवन हड्डियों के घनत्व को बढ़ाने में भी मदद करता है।

इस चीज का रखें विशेष ध्यान

वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक मात्रा में लौंग का सेवन करने से बचना चाहिए। बताया जाता है कि यदि अधिक मात्रा में लौंग का सेवन किया जाता हैं तो मेल हॉर्मोन टेस्टोस्टेरॉन गड़बड़ा सकता है। ऐसे में लौंग और इससे जुड़े प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल किसी आर्युवेदाचार्य की देखरेख में ही करना बेहतर होता है।
 


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