​कोरोना वैक्सीन के दुष्प्रभाव से बचाने राज्यों को बचाव केंद्र बनाने के निर्देश

टीम भारत दीप |

भारत में  कोविड-19 के कारण मृत्यु दर 1.45 फीसदी है, जो दुनिया में सबसे कम है। 
भारत में कोविड-19 के कारण मृत्यु दर 1.45 फीसदी है, जो दुनिया में सबसे कम है। 

वैक्सीन का दुष्प्रभाव मध्यम भी हो सकते हैं और गंभीर भी, लेकिन सरकार को पूरी तैयारी रखनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को टीका लगने के बाद कोई दुष्प्रभाव आता है तो उसे नजदीकी केंद्र में कहां और कैसे भर्ती किया जाए, यह जिम्मेदारी राज्यों की दी गई है। 

नईदिल्ली। कोरोना वायरस से बचने के लिए अमेरिका सहित कई देशों में टीकाकरण के दौरान सामने आए दुष्प्रभावों को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को हर ब्लॉक में कम से कम एक दुष्प्रभाव प्रबंधन केंद्र बनाने का निर्देश दिया है।

ये केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भी हो सकते हैं। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बताया कि टीकाकरण के लिए राज्यों में स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू हो चुका है। वैक्सीन लगने के बाद प्रतिकूल प्रभाव की घटनाएं सामने आ सकती हैं, इसके लिए राज्यों को तैयारी करनी चाहिए।

दुष्प्रभाव मध्यम भी हो सकते हैं और गंभीर भी, लेकिन सरकार को पूरी तैयारी रखनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को टीका लगने के बाद कोई दुष्प्रभाव आता है तो उसे नजदीकी केंद्र में कहां और कैसे भर्ती किया जाए, यह जिम्मेदारी राज्यों की दी गई है। 

एक और स्वदेशी टीका को अनुमति

तीसरे स्वदेशी टीके पर अंतिम परीक्षण की अनुमति मिल चुकी है। भारत बायोटेक और जाइडस कैडिला के बाद अब जेनेवा फार्मास्यूटिकल कंपनी का टीका भी परीक्षण की स्थिति में पहुंच चुका है। इसे सुरक्षित रखने के लिए कम तापमान की जरूरत नहीं है। सामान्य फ्रीज के तापमान में इसे रखा जा सकता है। 

 15.55 करोड़ से अधिक लोगों की हुई जांच

राजेश भूषण ने बताया कि भारत उन देशों में है जहां प्रति 10 लाख की आबादी कोरोना के मामलों की संख्या सबसे कम है। उन्होंने बताया कि भारत में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोरोना के मामलों की संख्या 7178 है, वहीं इसका वैश्विक औसत 9000 है।

देश में कोविड-19 के 15.55 करोड़ से अधिक नमूनों की अब तक जांच की गई है। देश में संक्रमण दर गिरकर 6.37 फीसदी हो गई है। भारत में वर्तमान में कोविड-19 के कारण मृत्यु दर 1.45 फीसदी है, जो दुनिया में सबसे कम है। 

एक बूथ पर रोज 200 का हो सकेगा टीकाकरण   

डॉ. पॉल ने कहा कि इस सप्ताह ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भारत की एक और संभावित वैक्सीन के लिए क्लिनिकल ट्रायल की अनुमति दी है।  यह वैक्सीन जेनोआ कंपनी ने भारत सरकार की रिसर्च एजेंसी डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की मदद से तैयार की है।

इस वैक्सीन के निर्माण में उसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जो फाइजर की वैक्सीन में है।देश में कोरोना वायरस की वैक्सीन के प्रबंधन को लेकर राजेश भूषण ने बताया कि इसे लेकर तैयारियां लगातार की जा रही हैं।

टीकाकरण के काम के लिए 29 हजार कोल्ड चेन प्वाइंट, 240 वॉक-इन कूलर, 70 वॉक-इन फ्रीजर, 45 हजार आइस-लाइन्ड रेफ्रिजरेटर, 41 हजार डीप फ्रीजर और 300 सोलर रेफ्रिजरेटर का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये सभी उपकरण पहले ही राज्य सरकारों के पास पहुंच चुके हैं।


संबंधित खबरें