बलरामपुर में आज पीएम मोदी करेंगे सरयू नहर का लोकार्पण, नौ जिलों में आएगी बहार

टीम भारत दीप |

गोंडा में दो लाख 41 हजार किसानों को सिंचाई का सीधा फायदा मिलेगा। 
गोंडा में दो लाख 41 हजार किसानों को सिंचाई का सीधा फायदा मिलेगा। 

जिला प्रशासन के रिकार्ड में दर्ज आंकड़ों के अनुसार यह परियोजना वर्ष 1978 में बहराइच व गोंडा जिले की सिंचाई सुविधा को बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी। शुरू में यह घाघरा कैनाल नाम से जानी गई। चार साल तक इसके निर्माण पर काम हुआ, लेकिन परियोजना पूरी नहीं हुई।

बलरामपुर। पीएम मोदी आज प्रदेश की बहुप्रतीक्षित सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण करेंगे। इस नहर के शुरू होने से पूर्वांचल के 9 जिलों को फायदा होगा, किसानों को सिंचाई के भरपूर्ण फायदा होगा।

आपकों बता दें कि यह परियोजना 1978 से शुरू हुई थी लेकिन इन 43 साालें में पूरी नहीं हुई आज जब पूरी हो रही है तो यह देश की सबसे बड़ी परियोजना के रूप में तैयार हुई है। इस नहर के पूरा होने से बलरामपुर सहित नौ जिलों के किसानों के लिए फायदेमंद होगी।

808 किलोमीटर लंबी इस नहर योजना से किसानों को महंगी सिंचाई की परेशानी से छुटकारा मिलेगा। गोंडा जिले में यह सरयू नहर बहराइच से होकर प्रवेश करेगी। एक-दो गैप को छोड़कर परियोजना का कार्य लगभग पूरा है। अब शनिवार को पीएम मोदी इस सौगात को देश को समर्पित करेंगे। 

समय के साथ खर्च और परियोजना बढ़ती गई

जिला प्रशासन के रिकार्ड में दर्ज आंकड़ों के अनुसार यह परियोजना वर्ष 1978 में बहराइच व गोंडा जिले की सिंचाई सुविधा को बढ़ाने के लिए शुरू की गई थी। शुरू में यह घाघरा कैनाल नाम से जानी गई।

चार साल तक इसके निर्माण पर काम हुआ, लेकिन परियोजना पूरी नहीं हुई। सुरसा की तरह परियोजना की लागत बढ़ती गई और काम भी पूरा नहीं हो पाया। वर्ष 1982 में  परियोजना का विस्तार करते हुए अन्य जिलों को भी इसमें शामिल कर दिया गया।

इसका नाम ट्रांस घाघरा-राप्ती-रोहिणी कर दिया गया। बाद में इसका नाम सरयू नहर परियोजना कर दी गई। करीब सवा लाख किलोमीटर तक फैली इस परियोजना से कई लाख किसानों को सिंचाई की समस्या से निजात मिलेगी। इस परियोजना का मुख्य भाग गोंडा है। जिले में बहराइच के रास्ते गोंडा में आईं दो मुख्य नहरों से 45 नहरें निकाली जा चुकी हें। 

मुख्य शाखा के अलावा माइनर व टेल तक पानी पहुंचाने की कवायद करीब 43 साल बाद पूरी हो रही है। गोंड जिले में 808 किलोमीटर नहर का जाल बिछ चुका है और इससे दो लाख 41 हजार किसानों को सिंचाई का सीधा फायदा मिलेगा।  

तीन का वजह से 26 गावों को नहीं मिलेगा लाभ

अधिशासी अभियंता सिंचाई सतीश कुमार ने बताया कि करनैलगंज के परसा गोड़री के धनई पट्टी में विभागीय खतौनी की भूमि होने के बावजूद तीन किसान परिवारों द्वारा अड़ंगेबाजी के चलते नहर नहीं बन पाई है।

जिसके कारण 26 गांवों के 20 हजार किसान नहर से मिलने वाली सिंचाई की सुविधा से वंचित बने रहेंगे। अब पुलिस प्रशासन की मदद से इस विवाद को निपटाने की कवायद चल रही है। 

अब लहलाएगी फसल

रुपईडीह ब्लाक के किसान सतगुरु कहते हैं कि सरयू नहर प्रथम खंड की 47 किलोमीटर की नहर उनके खेत के बगल से होकर निकली है। अब लगातार नहरों के चलने से सिंचाई की समस्या दूर होगी। राम राज मौर्य ने बताया कि बताया कि नहरों की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देना होगा।

ताकि इसका पूरा फायदा किसानों को मिल सके। किसान शौकत अली व  ने बताया कि हर साल गेहूं से लेकर अन्य फसलों की सिंचाई में बहुत पैसा खर्च होता था। अब नियमित पानी मिलने से डीजल खर्च की बचत होगी।

चार साल में पूरा हुआ नहर का काम

शनिवार का दिन किसानों के लिए खुशी का दिन है। अधिकारियों की सूझबूझ व मेहनत का परिणाम है कि बीते चार सालों में नहर का निर्माण पूरा हो गया है।

गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती सहित अन्य जिलों के किसानों को खेती की सिंचाई करने में अब समस्या होगी। समय-समय पर सिल्ट की सफाई होती रहेगी। नहरों की पटरियों को दुरस्त रखने, गुलाबा को ठीक रखने की जिम्मेदारी अधिकारी निरीक्षण कर देखते रहेंगे।

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