जिसकी हत्या के जुर्म में लोग काट रहे थे सजा, वो परिवार के साथ कर रही थी मजा

टीम भारत दीप |

उसके जीवित होने का प्रार्थना पत्र भी कालपी कोतवाली में दिया गया है।
उसके जीवित होने का प्रार्थना पत्र भी कालपी कोतवाली में दिया गया है।

इसकी जानकारी पुलिस को दी है। पुलिस मामले में जांच कर रही है। बता दें कि एक आरोपी की जेल ही मौत हो चुकी है।

जालौन. यूपी के जालौन जिले में एक किशोरी जो करीब 12 वर्ष पहले संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई थी। अब वह अचानक अलीगढ़ में मिल गई है। इतना ही नहीं उसकी हत्या के जुर्म में कुछ लोग सजा काट रहे हैं और वो अपने परिवार के साथ मजे से रह रही थी। अब आरोपियों में से किसी ने इसकी जानकारी पुलिस को दी है। पुलिस मामले में जांच कर रही है। बता दें कि एक आरोपी की जेल ही मौत हो चुकी है।  

जानकारी के मुताबिक 2008 में महिला जावित्री की बेटी रज्जो लापता हो गई थी। इसके बाद जालौन के कालपी थाने में किशोरी के अपहरण व हत्या में नगर पालिका के अधिकारी सभासद समेत छह लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मामले में सीबीसीआइडी ने जांच और पुलिस ने मां की तहरीर पर नगर पालिका के अधिकारी, सभासद समेत छह लोगों पर अपहरण, दुष्कर्म के बाद हत्या और अनुसूचित जाति उत्पीडऩ निवारण अधिनियम आदि संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था।

इतना ही नहीं तत्कालीन बसपा विधायक पर भी आरोप लगाए थे। फिर चार माह बाद घाटमपुर में मिले शव की पहचान जावित्री ने बेटी रज्जो के रूप में की थी। हालांकि शव का चेहरा पहचानना मुश्किल था लेकिन मां ने बेटी होने का दावा किया था। इसी वजह से पुलिस ने छह लोगों को जेल भेज दिया। इसमें एक आरोपी बनाई गई महिला की जेल में ही मौत हो गई थी। जबकि अन्य जमानत पर जेल से बाहर आ गए थे। एसपी यशवीर सिंह ने बताया कि प्रतिवादी पक्ष ने जावित्री को ढूंढ निकाला और मंगलवार को जावित्री की ओर से उसके जीवित होने का प्रार्थना पत्र भी कालपी कोतवाली में दिया गया है।

इसके बाद पुलिस आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है। रज्जो अलीगढ़ के एक गांव में मिली है। 12 साल से लापता 14 साल की किशोरी अब 26 वर्षीय की हो चुकी है। उसकी शादी भी हो चुकी है। परिवार के साथ उसके अलीगढ़ में रहने की जानकारी हुई तो कालपी पुलिस पहुंच गई। बताया जा रहा है कि वह अपने प्रेमी के साथ चली गई थी और फिर शादी रचा ली थी। पुलिस अब ये जांच कर रही है कि कहीं उसकी मां ने मिलीभगत से तो कोई खेल नहीं खेला था, जिसमें बेकसूर लोग जेल चले गए। 


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