तीन साल बाद प्रियंका गांधी पहुंचीं रायबरेली, स्वागत और मुलाकात को उमड़े कांग्रेसी

टीम भारत दीप |

दोनों विधायकों ने पिछले तीन साल में एक बार भी कांग्रेस हाईकमान से बात नहीं की।
दोनों विधायकों ने पिछले तीन साल में एक बार भी कांग्रेस हाईकमान से बात नहीं की।

रायबरेली में प्रियंका की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रविवार को उनसे मिलने के लिए कांग्रेसियों का हुजूम उमड़ पड़ा। उनकी एक झलक पाने के लिए कार्यकर्ता जगह-जगह खड़े दिखे। इसी दौरान महराजगंज के कांग्रेसी नेता सुशील पासी व एक अन्य नेता के बीच में किसी बात को लेकर कहासुनी होने लगी।

रायबरेली। मिशन 2022 में जुटी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अपने दो दिवसीय प्रवास पर शनिवार को प्रदेश की राजधानी पहुंचीं। वहां कांग्रेस नेताओं को कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद दूसरे दिन प्रियंका कांग्रेस की गढ़ रायबरेली पहुंची।

प्रियंका ने सर्वप्रथम हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। वहीं प्रियंका के स्वागत में कांग्रेसियों का हुजूम टूट पड़ा। प्रियंका से मिलने के लिए कांग्रेसी आपस में भिड़ते नजर आए।कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा र​विवार को रायबरेली पहुंचीं, बछरावां के चूरूवा मंदिर पर कांग्रेसियों ने उनका भव्य स्वागत किया।

प्रियंका ने हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद भुएमऊ गेस्ट हाउस के लिए रवाना हो गईं। यहां पर वह कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विधानसभा चुनाव को लेकर चर्च करेंगी। 

आपकों बता दें कि रासयबरेली और अमेठी को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है। पिछले दो चुनावों में अमेठी कांग्रेस के ​हाथ से फिसल गया, वहीं रायबरेली में अभी कांग्रेस की जड़े मजबूत है।बताते चलें कि आखिरी बार प्रियंका गांधी अपनी मां और सांसद सोनिया गांधी के साथ 2019 में लोकसभा चुनाव के बाद पहुंची थी। अब 3 साल बाद रायबरेली पहुंचीं।

प्रियंका से मिलने की होड़

रायबरेली में प्रियंका की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रविवार को उनसे मिलने के लिए कांग्रेसियों का हुजूम उमड़ पड़ा। उनकी एक झलक पाने के लिए कार्यकर्ता जगह-जगह खड़े दिखे।

इसी दौरान महराजगंज के कांग्रेसी नेता सुशील पासी व एक अन्य नेता के बीच में किसी बात को लेकर कहासुनी होने लगी। दोनों एक दूसरे को देख लेने की धमकी देने लगे, लेकिन वहां मौजूद अन्य लोगों ने दोनों नेताओं को किसी तरह शांत कराया। 

प्रियंका के साथ नहीं दिखेगा कोई विधायक

यह बड़ी विडंबना है कि कांग्रेस के गढ़ में इस समय कांग्रेस का कोई विधायक नहीं है। हालांकि चुनाव में दो विधायक जीतकर जरूर आए थे, लेकिन दोनों ने बगावत करके कांग्रेस से दूरी बना ली है।

इनमे से एक ने तो भाजपा का चोला ओढ़ लिया है तो दूसरे ने प्रियंका के खिलाफ बोलना अपनी फितरत बना ली है। इन दोनों विधायकों ने पिछले तीन साल में एक बार भी कांग्रेस हाईकमान से बात नहीं की।

आपकों बता दें कि विधान सभा चुनाव में रायबरेली सदर से अदिति सिंह और हरचंदपुर विधानसभा से राकेश सिंह  जीते थे, लेकिन अब दोनों ने पाला बदल लिया है। ऐसे में यह दोनों विधायक प्रियंका के साथ मंच साझा नहीं करेंगे। 

गढ़ को बचाने की कोशिश में प्रियंका 

प्रियंका गांधी के रायबरेली दौरे को राजनीतिक जानकार गढ़ बचाने की चुनौती के रूप में देख रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार नवेद शिकोह का कहना है कि जिस तरह रायबरेली और अमेठी गांधी परिवार से दूर होता जा रहा है। वह कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है।

अगर यहीं हाल रहा तो अमेठी के बाद रायबरेली से भी कांग्रेस का सफाया हो सकता है। दरअसल, 2019 में सोनिया के मुकाबले कभी उनके खास रहे दिनेश सिंह को भाजपा ने उतारा था। हालांकि, इसके बावजूद सोनिया गांधी चुनाव जीती थी, लेकिन वोटों का अंतर काफी कम हो गया था।

जहां सोनिया गांधी को 55.80% वोट मिले, वहीं दिनेश प्रताप सिंह को 38.36% वोट हासिल हुए थे। सोनिया को जिताने के लिए प्रियंका गांधी को भी बहुत मेहनत करनी पड़ी थी।तब कहीं जाकर सोनिया गांधी को 5 लाख 34 हजार 918 वोट मिले। हालांकि, बीजेपी के दिनेश सिंह भी सम्मान जनक स्थित में थे, उन्हें 3 लाख 67 हजार 740 वोट मिले थे।

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