पांच साल से जीजा के नाम पर सिपाही की नौकरी कर रहा था साला, भेद खुलने पर दोनों गए जेल

टीम भारत दीप |
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सुनील 5 सालों तक सिपाही बनकर अनिल कुमार के नाम से नौकरी करता रहा, किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सुनील 5 सालों तक सिपाही बनकर अनिल कुमार के नाम से नौकरी करता रहा, किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।

मुरादाबाद में पुलिस ने शुक्रवार को एक फर्जी सिपाही को हिरासत में लिया है। वह 5 साल से अपने जीजा के नाम पर उनकी जगह नौकरी कर रहा था। मामले की भनक अफसरों को लगी तो फर्जी सिपाही सुनील को आज हिरासत में ले लिया गया। असली सिपाही अनिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों के खिलाफ ठाकुरद्वारा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। डीआईजी शलभ माथुर ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।

मुरादाबाद । फर्जी शिक्षिका ​अनामिका शुक्ला तो आपकों याद है न, एक डिग्री पर प्रदेश में 25 जगह नौकरी करने का खुलासा होने पर पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया था। ठीक इसी तरह का एक मामला मुरादाबा से सामने आया यहां एक सिपाही की जगह उसका साला पांच साल से ड्यूटी कर रहा था,इसकी भनक प्रशासन को नहीं लगी। 

मुरादाबाद में पुलिस ने शुक्रवार को एक फर्जी सिपाही को हिरासत में लिया है। वह 5 साल से अपने जीजा के नाम पर उनकी जगह नौकरी कर रहा था। मामले की भनक अफसरों को लगी तो फर्जी सिपाही सुनील को आज हिरासत में ले लिया गया। असली सिपाही अनिल को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों के खिलाफ ठाकुरद्वारा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। डीआईजी शलभ माथुर ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं।

अनिल कुमार 2011 बैच का सिपाही

मालूम हो कि अनिल कुमार 2011 बैच का सिपाही है। वह मुजफ्फरनगर के खतौली कस्बे का रहने वाला है। उसका साला सुनील कुमार भी खतौली का ही रहने वाला है। पीआरवी पर अनिल कुमार की ड्यूटी थी। करीब पांच साल पहले उसका चयन शिक्षक पद पर हुआ था।

उसने विभाग से इस्तीफा दिए बगैर अपने साले सुनील उर्फ सनी को अपनी जगह अपने नाम से ड्यूटी पर लगा दिया। फर्जी कांस्टेबल सुनील 5 सालों तक सिपाही बनकर अनिल कुमार के नाम से नौकरी करता रहा। किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। वही जीजा अनिल शिक्षक की नौकरी करने चला गया। भेद खुलने पर पुलिस विभाग के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारी हैरान है। 

बिलारी में नौकरी करने के दौरान हुआ था तबादला

2017 में कांस्टेबल अनिल कुमार को मुरादाबाद के बिलारी थाना क्षेत्र में डॉयल 112 पर पोस्ट किया गया था। यहां उसने महज चार महीने नौकरी की। इसके बाद विभागीय सांठगांठ करके उसने अपने स्थान पर अपने साले सुनील पुत्र राजपाल निवासी कंधारी थाना खतौली मुजफ्फर नगर को अपनी जगह एडजस्ट कर दिया। तब से अनिल के नाम से उसका साला सुनील ही विभाग में कांस्टेबल की नौकरी कर रहा था। बिलारी में नौकरी करने के बाद उसका तबादला ठाकुरद्वारा की पीआरवी 281 पर कर दिया गया था।

शिकायत पर खुला भेद

विभागीय अधिकारियों को गोपनीय शिकायत मिलने के बाद फर्जी कांस्टेबल की नौकरी का भेद खुला। इसके बाद अफसर दंग रह गए। तुरंत इसकी जानकारी डीआईजी व अन्य अधिकारियों को दी गई। मामला संज्ञान में आते ही डीआईजी ने प्रकरण में जांच के आदेश दिए हैं।

तीसरी बार में पास हुआ था अनिल

सीओ ठाकुरद्वारा डॉ अनूप यादव ने बताया कि मुजफ्फरनगर में खतौली थाना क्षेत्र के गांव दाहौड़ निवासी अनिल कुमार पुत्र सुखपाल सिंह प्रशिक्षण के दौरान दो बार फेल हुआ था। उसका प्रशिक्षण बरेली में हुआ था। जिसमें वह फेल हो गया था। इसके बाद उसका मेरठ में हुए प्रशिक्षण में भी वह फेल हो गया था।

तीसरी बार गोरखपुर में हुए प्रशिक्षण में वह उत्तीर्ण हुआ। इसके बाद 2012 में उसने नौकरी ज्वाइन की थी। उसकी पहली तैनाती बरेली में हुई। जहां वह 2012 से 2016 तक पीआरवी में रहा। 2017 में उसका तबादला मुरादाबाद जनपद को हुआ।

इस मामले में अधिकारी फिलहाल बात करने से कतरा रहे हैं। मामले की जांच एसपी ग्रामीण विद्या सागर मिश्रा को सौंपी गई है। उनका कहना है कि अभी प्रकरण की जांच चल रही है। जांच पूरी होने तक वह कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कह पाएंगे। सीओ ठाकुरद्वारा ने भी फिलहाल इस पर कुछ बोलने से मना कर दिया है।डीआईजी शलभ माथुर बोले विभागीय मिलीभगत की जांच और कार्रवाई होगी।

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